ओडिया सहकारी समिति की वित्तीय जांच पर सवाल, जांच प्रतिवेदन की प्रक्रिया स्पष्ट करने की मांग
*7 महीने से वेतन नहीं मिलने, समिति प्रभारी की कार्यप्रणाली और कथित फर्जी बिलों की जांच का मामला; जांच दल की भूमिका और दस्तावेजों को लेकर उठे सवाल*

बेमेतरा – सेवा सहकारी समिति मर्यादित ओडिया में कथित वित्तीय अनियमितताओं और कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर 27 अक्टूबर 2026 को की गई लिखित शिकायत के बाद जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। शिकायत में समिति प्रभारी मनीष वर्मा की कार्यप्रणाली, समिति में कथित अनियमित उपस्थिति, कर्मचारियों को पिछले सात महीने से वेतन नहीं मिलने तथा कथित फर्जी बिलों के माध्यम से राशि आहरित किए जाने के आरोपों की जांच की मांग की गई है।मामले की जांच के लिए शाखा प्रबंधक खंडसरा शत्रुघ्न देवांगन के नाम सामने आने के बाद जांच प्रतिवेदन तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायत से जुड़े पक्षों के अनुसार, प्रतिवेदन में हेम प्रकाश साहू की भूमिका को लेकर यह स्पष्ट होना जरूरी है कि उन्हें जांच दल में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है या नहीं। यदि वे जांच दल के सदस्य हैं, तो उनके नामांकन अथवा अधिकृत आदेश की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल
यदि जांच प्रतिवेदन तैयार करने में ऐसे व्यक्ति की भूमिका है, जिसकी नियुक्ति या अधिकृत सहभागिता का स्पष्ट दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, तो जांच अधिकारियों को इसकी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। साथ ही, यह भी बताया जाना चाहिए कि जांच किस आदेश के तहत गठित की गई, जांच में किन अधिकारियों और सदस्यों को शामिल किया गया तथा संबंधित अभिलेखों का परीक्षण किस प्रक्रिया से किया जा रहा है।
समिति के कामकाज से जुड़े किसी व्यक्ति के अन्य स्थान पर जाकर जांच प्रक्रिया में शामिल होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में अनुमति, नियुक्ति आदेश अथवा अन्य प्रमाणित दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी आवश्यक है।
कर्मचारियों के वेतन और कथित बिलों की जांच अहम
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल कर्मचारियों को कथित तौर पर सात महीने से वेतन नहीं मिलने और बिलों के माध्यम से वित्तीय अनियमितता के आरोपों का है। जांच में संबंधित बिल, भुगतान वाउचर, बैंक लेनदेन, समिति के लेखा अभिलेख, उपस्थिति पंजी और वेतन भुगतान संबंधी दस्तावेजों का परीक्षण किया जाना चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
अब संबंधित जांच अधिकारियों और सहकारिता विभाग से अपेक्षा है कि वे जांच दल की अधिकृत संरचना, प्रतिवेदन तैयार करने की प्रक्रिया और शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्थिति स्पष्ट करें। जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और दस्तावेज आधारित होनी चाहिए, ताकि न तो किसी दोषी को अनुचित संरक्षण मिले और न ही बिना प्रमाण किसी व्यक्ति को दोषी ठहराया जाए।
बड़ा सवाल: क्या ओडिया सहकारी समिति में उठे वित्तीय अनियमितता और वेतन भुगतान के आरोपों की जांच सभी संबंधित अभिलेखों के आधार पर हो रही है? जांच दल में शामिल अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों की अधिकृत भूमिका स्पष्ट करने के लिए विभाग कब तक दस्तावेजी जानकारी सामने रखेगा?


