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November 6, 2026 11:56 pm

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मरीज की शिकायत से औचक निरीक्षण तक, फिर कार्रवाई पर सवाल! गायत्री अस्पताल मामले में जवाबदेही किसकी?

मरीज की शिकायत से औचक निरीक्षण तक, फिर कार्रवाई पर सवाल! गायत्री अस्पताल मामले में जवाबदेही किसकी?

 

नर्सिंग होम के संचालन, चिकित्सकीय सुविधाओं और कथित अनियमितताओं की जांच के बाद ठोस कार्रवाई हुई या मामला फाइलों तक सीमित है? स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर उठ रहे सवाल, जिला प्रशासन और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों से जवाब की मांग।

नवागढ़, बेमेतरा। पहले मरीज की शिकायत, फिर स्वास्थ्य विभाग के औचक निरीक्षण में कथित तौर पर मिलीं कई खामियां—इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आने से नवागढ़ स्थित गायत्री अस्पताल का मामला सवालों के घेरे में है। सवाल सिर्फ एक अस्पताल का नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और शिकायतों पर प्रशासनिक जवाबदेही का भी है।

 

यदि निरीक्षण के दौरान अस्पताल में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई थी, तो अब तक की कार्रवाई क्या है? क्या कमियों को दूर करने के निर्देश दिए गए? क्या उनका दोबारा भौतिक सत्यापन हुआ? और यदि नियमों का गंभीर उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की स्थिति क्या है? इन सवालों का स्पष्ट और दस्तावेजी जवाब सामने आना जरूरी है।

 

नर्सिंग होम के नियमों का पालन हुआ या सिर्फ निरीक्षण तक सीमित रही कार्रवाई?

 

निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम का संचालन लागू पंजीयन एवं नियामकीय प्रावधानों के अनुरूप होना चाहिए। अस्पताल की पंजीयन स्थिति, निर्धारित चिकित्सकीय स्टाफ, डॉक्टरों की शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यता, उपलब्ध सुविधाएं, दवाओं का सुरक्षित रखरखाव, जैव-चिकित्सकीय अपशिष्ट प्रबंधन और अग्नि सुरक्षा जैसे पहलुओं की जांच मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

 

ऐसे में गायत्री अस्पताल के मामले में यह स्पष्ट होना चाहिए कि निरीक्षण के दौरान किन बिंदुओं पर कमियां दर्ज की गईं, संबंधित अस्पताल प्रबंधन को क्या निर्देश दिए गए और उन निर्देशों के पालन की पुष्टि किस स्तर पर की गई। यदि कोई कमी गंभीर प्रकृति की थी, तो लागू कानूनों और नियमों के तहत नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं हुई—यह सवाल स्वास्थ्य विभाग से पूछा जाना चाहिए।

 

शिकायतों पर कार्रवाई का रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं?

 

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया जाना अपने आप में अंतिम कार्रवाई नहीं है। निरीक्षण के निष्कर्ष, जांच रिपोर्ट, कारण बताओ नोटिस, अस्पताल प्रबंधन का जवाब, अनुपालन रिपोर्ट और अंतिम आदेश—ये सभी संबंधित मामले में वास्तविक कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं।

 

यदि शिकायतें लंबे समय से लंबित हैं, तो जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को बताना चाहिए कि देरी के कारण क्या हैं। वहीं, यदि कार्रवाई हो चुकी है, तो उसके आदेश और अनुपालन की स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए। केवल जांच या नोटिस जारी होने को अंतिम कार्रवाई मान लेना भी पर्याप्त नहीं है।

 

जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही तय हो

 

मरीज स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा करके अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे में किसी अस्पताल में नियमों के उल्लंघन की शिकायत सामने आने पर निष्पक्ष जांच और समयबद्ध निर्णय सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। जिला कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, संबंधित स्वास्थ्य विभाग और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

 

स्वास्थ्य मंत्री और उपमुख्यमंत्री तक शिकायत पहुंचने का दावा यदि दस्तावेजों से प्रमाणित होता है, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित स्तर पर शिकायत पर क्या संज्ञान लिया गया और क्या निर्देश जारी किए गए। किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि पर संरक्षण देने का आरोप बिना ठोस प्रमाण के निष्कर्ष के रूप में नहीं लगाया जा सकता, लेकिन शिकायतों पर कार्रवाई की स्थिति पूछना जनता का अधिकार है।

 

पत्रकार की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच भी महत्वपूर्ण

 

यदि इस मामले की पड़ताल करने वाले पत्रकार को धमकी, दबाव या किसी अन्य प्रकार की परेशानी का सामना करना पड़ा है, तो उससे जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अलग से निष्पक्ष जांच की मांग की जानी चाहिए। पत्रकार की सुरक्षा और स्वतंत्र रिपोर्टिंग के अधिकार का सम्मान होना चाहिए। हालांकि, किसी कथित घटना को प्रशासन की मिलीभगत या अपराध को संरक्षण देने का प्रमाण तभी माना जा सकता है, जब उसकी पुष्टि विश्वसनीय साक्ष्यों से हो।

 

अब सवालों का जवाब कौन देगा?

 

गायत्री अस्पताल मामले में मुख्य सवाल यही है कि मरीज की शिकायत और स्वास्थ्य विभाग के निरीक्षण के बाद वास्तविक कार्रवाई कहां तक पहुंची? क्या अस्पताल की कमियों का निराकरण हो चुका है? क्या नियमों के पालन का दोबारा सत्यापन किया गया? और यदि शिकायतों पर कार्रवाई लंबित है, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?

 

जनता को आश्वासन नहीं, कार्रवाई का रिकॉर्ड चाहिए। यदि अस्पताल के विरुद्ध शिकायतें निराधार हैं, तो जांच के निष्कर्ष सामने रखे जाएं; और यदि अनियमितताएं प्रमाणित हुई हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। आखिर मरीजों की सेहत से जुड़े मामले में जवाबदेही तय करने के लिए प्रशासन को और कितने निरीक्षणों तथा शिकायतों का इंतजार करना पड़ेगा?

Binod Kumar
Author: Binod Kumar

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