रायपुर की महफिल में बेमेतरा के युवा साहित्यकार उमराव सिंह वर्मा ने बांधा काव्य का समां
*साहित्य सृजन संस्थान की 50वीं काव्य संध्या में देशभर के साहित्यकारों का जुटा रचनात्मक संगम, कविता और अदब की महफिल में गूंजे संवेदनाओं के स्वर*

बेमेतरा – अल्फाज जब दिल की गहराइयों से निकलते हैं, तो महफिल सिर्फ महफिल नहीं रहती, बल्कि संवेदनाओं, विचारों और एहसासों का खूबसूरत कारवां बन जाती है। कुछ ऐसा ही साहित्यिक नजारा रायपुर के वृंदावन सभागार में देखने को मिला, जहां साहित्य सृजन संस्थान (पंजीकृत), रायपुर की 50वीं काव्य संध्या में बेमेतरा जिले के युवा साहित्यकार उमराव सिंह वर्मा ने अपने काव्यपाठ से साहित्यिक उपस्थिति दर्ज कराई।
इस गरिमामय आयोजन में पचास साहित्यकारों ने क्रमशः अपनी कविताओं का पाठ किया। शब्दों की इस महफिल में कहीं भावनाओं की गहराई दिखाई दी, तो कहीं जीवन के अनुभवों और सामाजिक सरोकारों की झलक देखने को मिली। काव्य संध्या ने साहित्य प्रेमियों को रचनात्मक अभिव्यक्ति और साहित्यिक संवाद का यादगार अवसर प्रदान किया।
*दिग्गज साहित्यकारों की मौजूदगी ने बढ़ाई महफिल की रौनक*
कार्यक्रम में संरक्षक एवं मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. संजय अलंग उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों के रूप में भिलाई की वरिष्ठ राष्ट्रीय कवयित्री संतोष झांझी, कोरबा की लोकप्रिय कवयित्री फिरोजा खान तथा राजकुमार धर द्विवेदी ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से आयोजन की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम की अध्यक्षता वीर अजीत शर्मा ने की।
*बेमेतरा के साहित्यिक गौरव को मिला मंच*
जिले के युवा साहित्यकार उमराव सिंह वर्मा की सहभागिता ने बेमेतरा की साहित्यिक पहचान को रायपुर के इस प्रतिष्ठित मंच पर स्थान दिलाया। साहित्यकारों के बीच काव्यपाठ का यह अवसर रचनात्मक प्रतिभा, विचारों की विविधता और साहित्य के प्रति समर्पण का प्रतीक बना।
साहित्य सृजन संस्थान की यह 50वीं काव्य संध्या केवल कविताओं की प्रस्तुति तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने साहित्यकारों के बीच संवाद, परस्पर जुड़ाव और सृजनशीलता को प्रोत्साहित करने का संदेश भी दिया।
शब्दों की खुशबू, भावों की रवानी और साहित्य के प्रति समर्पण—इन्हीं रंगों से सजी यह काव्य संध्या बेमेतरा के युवा साहित्यकार उमराव सिंह वर्मा के लिए भी एक उल्लेखनीय साहित्यिक अवसर रही।


