नवागढ़ जनपद में फर्जी बिल की शिकायत पर जांच पूरी, गबन नहीं मिला तो 15-20 लाख का हिसाब कहां?
13.13 लाख के भुगतान का परीक्षण, स्टाम्प शुल्क खाते से हुआ भुगतान सामने आया; जांच समिति ने गबन की पुष्टि नहीं की, लेकिन शिकायत की पूरी रकम का हिसाब अब भी सवालों में

नवागढ़/बेमेतरा। जनपद पंचायत नवागढ़ में स्टाम्प शुल्क मद की राशि से फर्जी बिल लगाकर करीब 15 से 20 लाख रुपये खर्च किए जाने की शिकायत ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। शिकायत के बाद जिला पंचायत बेमेतरा ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर मामले की जांच कराई। जांच पूरी होने के बाद समिति ने उपलब्ध दस्तावेजों और अधिकारियों-कर्मचारियों के बयानों के आधार पर गबन की पुष्टि नहीं की। लेकिन जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद एक नया सवाल खड़ा हो गया है—जिस शिकायत में 15 से 20 लाख रुपये के फर्जी भुगतान का आरोप था, जांच आखिर 13.13 लाख रुपये के भुगतान तक ही कैसे सीमित रही?
13.13 लाख का भुगतान, लेकिन शिकायत की रकम ज्यादा
जांच समिति ने त्रिस्तरीय पंचायत आम निर्वाचन 2024-25 से संबंधित विभिन्न भुगतान और देयकों का परीक्षण किया। रिपोर्ट में कुल 13,13,418 रुपये के भुगतान का उल्लेख है। इसमें अजंय टेंट हाउस एवं कैटरिंग, भवानी टाइपिंग एवं प्रिंटर्स, महामाया प्रिंटर्स सहित कंप्यूटर, स्टेशनरी, किराया, बिजली, फोटोकॉपी और निर्वाचन संबंधी अन्य खर्च शामिल बताए गए हैं।
जांच में जिला स्तर से प्राप्त 1,18,000 रुपये का भी उल्लेख है, जबकि विभिन्न फर्मों को भुगतान की राशि 11,95,418 रुपये बताई गई है।
यहीं से मामला पेचीदा हो जाता है। शिकायत में आरोप 15 से 20 लाख रुपये का था, जबकि जांच में 13.13 लाख रुपये के भुगतान का परीक्षण सामने आया। आखिर शेष राशि का क्या हुआ?
स्टाम्प शुल्क खाते से भुगतान, ब्याज की रकम भी सामने आई
जांच समिति ने बैंक खाता क्रमांक 30758815384 का भी परीक्षण किया। रिपोर्ट के अनुसार लेखापाल ने बताया कि इस खाते में जनपद पंचायत कर्मचारियों के वेतन-भत्ते से संबंधित स्टाम्प शुल्क की राशि जमा थी।
बैंक स्टेटमेंट के परीक्षण में 1 अप्रैल 2022 से 5 अगस्त 2025 तक करीब 9 लाख रुपये ब्याज प्राप्त होने की जानकारी भी रिपोर्ट में दर्ज है। इसी खाते से डीजल, स्टेशनरी सहित अन्य भुगतानों का उल्लेख भी सामने आया है।
रिपोर्ट के मुताबिक उच्च कार्यालय से प्राप्त राशि भी इसी खाते में जमा होती रही। जिला पंचायत से अलग-अलग अवसरों पर प्राप्त 71,77,149 रुपये, 31,89,693 रुपये और 23 लाख रुपये, जबकि सरवर मेला 2024 के लिए 5.21 लाख रुपये उपलब्ध कराए जाने का भी उल्लेख जांच रिपोर्ट में है।
जांच समिति ने क्या कहा?
दस्तावेजों, बैंक स्टेटमेंट और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के बयानों के परीक्षण के बाद समिति ने माना कि निर्वाचन के दौरान उपयोग की गई सामग्री एवं दस्तावेजों के देयकों का भुगतान स्टाम्प शुल्क खाते में उपलब्ध राशि से किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार राशि उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में जनपद पंचायत नवागढ़ ने जिला निर्वाचन अधिकारी से राशि उपलब्ध कराने के लिए मांग पत्र भी भेजा था।
उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर समिति ने निर्वाचन 2024-25 के बिल/देयक भुगतान में गबन की पुष्टि नहीं की।
लेकिन असली सवाल अब भी बाकी!
जांच रिपोर्ट ने गबन के आरोप को प्रमाणित नहीं किया, लेकिन इससे शिकायत में उठे सभी सवाल अपने आप खत्म होते दिखाई नहीं देते।
क्या 15 से 20 लाख रुपये की शिकायत में बताए गए सभी बिलों की जांच हुई?
क्या प्रत्येक फर्म से वास्तविक सामग्री या सेवा प्राप्त होने का स्वतंत्र सत्यापन किया गया?
क्या टेंट, प्रिंटिंग, स्टेशनरी, किराया और अन्य कार्यों का भौतिक सत्यापन किया गया?
13.13 लाख रुपये के परीक्षण के बाद शिकायत में बताई गई शेष राशि का हिसाब किस अभिलेख में है?
और सबसे बड़ा सवाल—क्या केवल बिल, कैशबुक और बैंक स्टेटमेंट का मिलान ही पर्याप्त था, या फर्जी बिल के आरोप की पुष्टि के लिए संबंधित फर्मों और वास्तविक कार्यस्थल का भी सत्यापन किया गया?
गबन की पुष्टि नहीं, लेकिन मामला पूरी तरह खत्म भी नहीं?
जांच समिति ने उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर गबन की पुष्टि नहीं की है। इसलिए जांच रिपोर्ट के आधार पर किसी अधिकारी या कर्मचारी पर गबन का आरोप सिद्ध मानना उचित नहीं होगा। लेकिन शिकायत में लगाए गए आरोप और जांच में परीक्षण की गई राशि के बीच अंतर ने वित्तीय पारदर्शिता और जांच की पूर्णता को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
अब निगाह जिला पंचायत प्रशासन पर है कि 13.13 लाख रुपये के भुगतान और शिकायत में बताई गई 15 से 20 लाख रुपये की राशि के अंतर को लेकर क्या स्पष्ट जवाब दिया जाता है और क्या सभी कथित बिलों का स्वतंत्र सत्यापन कराया जाएगा।
क्योंकि जांच में गबन नहीं मिला—लेकिन सवाल यह है कि शिकायत में उठाए गए बाकी सवालों की जांच आखिर कितनी हुई?


