सितंबर में किसान नहीं बरतें लापरवाही, धान से लेकर रबी फसल तक इन कामों पर दें खास ध्यान

कृषि वैज्ञानिक डॉ. चंद्रशेखर खरे की किसानों को सलाह—धान में तना छेदक और झुलसा रोग से बचाव के साथ रबी फसल के बीज की अभी से करें तैयारी
पामगढ़। खरीफ सीजन के दौरान सितंबर महीना किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस समय धान की फसल में कीट एवं रोगों की निगरानी के साथ खेतों की देखभाल और आगामी रबी फसल की तैयारी भी जरूरी हो जाती है। किसानों को समय पर सही कृषि कार्य करने और संभावित नुकसान से बचाने के उद्देश्य से संयुक्त जन जागरूकता अभियान के तहत वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. चंद्रशेखर खरे (सस्य विज्ञान) एवं प्रक्षेत्र विस्तार अधिकारी जितेंद्र कुमार खरे ने सितंबर माह के प्रमुख कृषि कार्यों को लेकर किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की है।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से मौसम और फसल की स्थिति के अनुसार कृषि कार्य करने तथा कीट-रोगों की नियमित निगरानी करने की अपील की है।
धान नहीं लगा पाए तो इन फसलों का करें चुनाव
जिन किसानों की जमीन पर किसी कारणवश धान की फसल नहीं लग पाई है, वे खाली खेतों में कुलथी, रामतिल, उड़द, टोरिया, मक्का, सूरजमुखी, सब्जी एवं चारा फसलों की बुवाई कर सकते हैं। इससे खेत खाली रहने के बजाय वैकल्पिक फसल से उत्पादन लिया जा सकेगा।
तना छेदक कीट पर रखें नजर, अंड समूह को करें नष्ट
धान की फसल में तना छेदक कीट की निगरानी को लेकर किसानों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। वयस्क कीट दिखाई देने पर फसल का निरीक्षण कर अंड समूहों को एकत्र कर नष्ट करने तथा डेड हार्ट यानी सूखे पत्तों को खींचकर निकालने की सलाह दी गई है।
तना छेदक की निगरानी के लिए फेरोमोन ट्रैप का उपयोग भी किया जा सकता है।
धान में झुलसा रोग दिखे तो तुरंत करें निगरानी
कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि धान में झुलसा रोग के लक्षण दिखाई देने पर किसान तत्काल फसल का निरीक्षण करें। रोग के लक्षण दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार उपचार करें।
वहीं जीवाणु जनित झुलसा रोग की स्थिति में खेत में उपलब्ध पानी को निकालकर कुछ समय के लिए खेत को खुला रखने तथा कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार पोटाश का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
खरपतवार नियंत्रण और पोषक तत्वों पर भी दें ध्यान
उच्चहन धान के खेतों को खरपतवार से मुक्त रखने पर जोर दिया गया है। बारिश की स्थिति और फसल की आवश्यकता के अनुसार नत्रजन उर्वरक का संतुलित उपयोग करने की सलाह दी गई है।
किसानों को यह भी कहा गया है कि उर्वरकों और कीटनाशकों का प्रयोग फसल की अवस्था एवं स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करें।
अदरक-हल्दी में मिट्टी चढ़ाएं, पलवार करें
अदरक और हल्दी की फसल में हल्की मिट्टी चढ़ाकर पलवार करने की सलाह दी गई है। इससे फसल की उचित देखभाल में मदद मिल सकती है।
वहीं आम की फसल की समाप्ति के बाद रोगग्रस्त शाखाओं की हल्की छंटाई करने तथा आम के बगीचों में मिली बग के नियंत्रण के लिए आवश्यक कृषि कार्य करने की सलाह दी गई है।
शिमला मिर्च और खरीफ प्याज की रोपाई का समय
किसानों को सितंबर माह में शिमला मिर्च की रोपाई तथा खरीफ प्याज की खेतों में रोपाई का कार्य करने की सलाह दी गई है।
साथ ही आने वाले रबी सीजन को देखते हुए किसानों से अभी से प्रमाणित एवं उपयुक्त बीज की व्यवस्था करने की अपील की गई है, ताकि बुवाई के समय बीज की समस्या का सामना न करना पड़े।
रबी की तैयारी अभी से, नर्सरी पर भी दें ध्यान
शरद ऋतु के एक वर्षीय पौधों के लिए नर्सरी तैयार करने की सलाह भी कृषि वैज्ञानिकों ने दी है। किसानों से कहा गया है कि आगामी फसल और बागवानी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए समय रहते तैयारी पूरी करें।
मोबाइल एप से भी मिलेगी खेती-किसानी की जानकारी
किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए क्रॉप डॉक्टर, राइस आईएफसी और हर्बकेल-हर्बिसाइड कैलकुलेटर जैसे कृषि संबंधी मोबाइल एप की जानकारी भी दी गई है। किसानों को कृषि संबंधी जानकारी और फसल प्रबंधन के लिए विश्वसनीय कृषि स्रोतों एवं नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से मार्गदर्शन लेने की सलाह दी गई है।
किसानों से अपील—फसल को रोज देखें, समस्या दिखे तो तुरंत लें सलाह
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की है कि सितंबर माह में खेतों का नियमित निरीक्षण करें। फसल में कीट, रोग, खरपतवार या पोषक तत्वों से संबंधित समस्या दिखाई देने पर समय रहते कृषि विशेषज्ञों से सलाह लें।
उन्होंने कहा कि समय पर पहचान और उचित प्रबंधन से फसल को संभावित नुकसान से बचाने में मदद मिल सकती है।
यह संयुक्त जन जागरूकता अभियान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं महान समाजसेवक स्व. हिंच्छाराम खरे, स्व. गणेशराम खरे तथा महान देहदानी स्व. मनोज कुमार खरे की स्मृति में किसान एवं समाजहित में संचालित किया जा रहा है।
कृषकों के लिए संदेश
“सितंबर में खेत की निगरानी बढ़ाएं, धान को कीट-रोगों से बचाएं, रबी की तैयारी अभी से शुरू करें और किसी भी कृषि समस्या पर विशेषज्ञों की सलाह जरूर लें।”
कृषकों की सेवा में सदैव तत्पर —
डॉ. चंद्रशेखर खरे, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक एवं कृषक वैज्ञानिक सलाहकार
जितेंद्र कुमार खरे, प्रक्षेत्र विस्तार अधिकारी
संयुक्त जन जागरूकता अभियान, पामगढ़


